सोमवार, 15 जुलाई 2024

सहस्त्राक्षरी सिद्ध लक्ष्मी महाविद्या मन्त्र

Sahasraakshari Siddha Lakshmi Mahavidya Mantra 

सहस्त्राक्षरी सिद्ध लक्ष्मी महाविद्या मन्त्र
विनियोग : ॐ अस्य श्री सर्व महाविद्या महारात्रि गोपनीय मन्त्र रहस्याति मयी पराशक्ति श्री मदाद्या भगवती सिद्ध लक्ष्मी सहस्त्राक्षरी सहस्त्र रूपाणि महाविद्या श्री इन्द्र ऋषि गायत्र्यादी नानाछन्दांसि , नव कोटि शक्ति रूपा श्री मदाद्य भगवती सिद्ध लक्ष्मी देवता श्री मदाद्य सिद्ध लक्ष्मी प्रसादादखिलेष्टर्थ जपे पाठे विनियोगः /

मन्त्र : ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ह सौ श्रीं ऐं ह्रीं क्लीं सौ; सौ;ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं जय जय महालक्ष्मी,जगदाद्ये , विजये ,सुरा सुर त्रिभुवन निदाने , दयां करे सर्व देव तेजो रूपिणी विरंचि संस्थिते , विधि वरदे , सच्चिदानन्दे , विष्णु देह आवृते , महामोहिनी , नित्य वरदान तत्परे महा सुधाब्धि बासिनि , महातेजो धारिणी सर्वाधारे , सर्व कारण कारिणे , अचिन्त्य रुपे , इन्द्रादि सकल निर्जर सेविते , साम गान गायन परिपुणोदय कारिणी विजये  , जयन्ती अपराजिते , सर्व सुन्दरी , रकतांशुके ,सूर्य कोटि सकांशे , चंद्र कोटि सुशीतले  , अग्नि कोटि दहन शीले , याम कोटि वहन  शीले , ॐकार  नाद  विन्दु रूपिणी , निगमागम भागदायिनी , त्रिदश राज्य दायिनी , सर्व स्त्री रत्न स्वरूपिणी , दिव्य देहिनी , निर्गुणे सगुणे , सद  सद  रूप धारिणी , सुर वरदे , भक्त त्राण तत्परे , बहु बरदे , सहस्त्राक्षरे , अयुताक्षरे  सप्त कोटि लक्ष्मी रूपिणी , अनेक लक्ष लक्ष स्वरुपे अनन्त कोटि ब्रह्मांड नायिके चतुविशंति मुनि जन संस्थिते , चतुर्दश भुवन भाव विकारिने गगन वाहिनी , नाना मन्त्र राज विराजिते सकल सुन्दरी गण सेविते , चरणारबिंद्र , महात्रिपुर सुन्दरि , कामेशदयिते करुणा रस कल्लोलिनी , कल्प वृक्षादि स्थिते ,चिन्तामणि दव्य मध्यावस्थिते , मणि मन्दिरे निवासिनी , विष्णु वक्ष स्थल कारिणे , अजिते , अमले , अनुपम चरिते , मुक्ति क्षेत्राधष्ठायिनी प्रसीद प्रसीद , सर्व मनोरथान पूरय पूरय , सर्वारिष्टान छेदय छेदय सर्व ग्रह  पीड़ा ज्वराग्र भय विध्वंसय विध्वंसय , सर्व त्रिभुवन जातं वशय वशय , मोक्ष मार्गणी दर्शय दर्शय ज्ञान मार्ग प्रकाशय प्रकाशय , अज्ञान तमो नाशय नाशय , धन धान्यादि वृद्धि कुरु कुरु , सर्व कल्याणनि कल्पय कल्पय मां रक्ष रक्ष , सर्वायदभ्यो निस्तारय निस्तारय , वज्र शरीरं साधय साधय ह्री सहस्त्राक्षरी सिद्ध लक्ष्मी महा विद्यायै नमः /

मंगलवार, 25 जून 2024

Hanuman Chalisa

Hanuman Chalisa
हनुमान चालीसा
दोहा :
श्री गुरु चरन सरोज रज , निज मनु मुकुरु सुधारि /
बरनऊँ  रधुबर बिमल जासु , जो दायकु फल चारि //
बुद्धिहीन तनु जानिके , सुमिरौ पवन कुमार /
बल बुद्धि विद्द्या देहु मोहिं , हरहु कलेस बिकार //
चौपाई :
 जय हनुमान ज्ञान गुण  सागर / जय कपीस तिहुँ लोक उजागर //
राम दूत अतुलित बल धामा / अंजनि पुत्र पवनसुत नामा //
महाबीर बिक्रम बजरंगी / कुमति निवार सुमति के संगी //
कंचन बरन बिराज सुबेसा / कानन कुंडल कुंचित केसा //
हाथ ब्रज औ ध्वजा बिराजै / काँधे मूँज जनेऊ साजै //
संकर सुवन केसरीनंदन / तेज प्रताप महा जग बंदन //
बिद्यावान गुनी अति चातुर / राम काज करिबे को आतुर //
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया / राम लषन सीता मन बसिया //
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा /बिकट रूप धरि लंक जरावा //
भीम रूप धरि असुर सँहारे / रामचन्द्र के काज सँवारे //
लाय सजीवन लखन जियाये /श्रीरधुबीर हरषि उर लाये //
रधुपति कीन्ही बहुत बड़ाई / तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई //
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं / अस कहिं श्रीपति कंठ लगावैं //
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा /नारद सारद सहित अहीसा //
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते / कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते //
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा / राम मिलाय राज पद दीन्हा //
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना / लंकेस्वर भए सब जग जाना //
जग सहस्त्र जोजन पर भानू / लील्यो ताहि मधुर फल जानू  //
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं / जलधि लाँधि गये अचरज नाहीं //
दुर्गम काज जगत के जेते / सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते //
राम दुआरे तुम रखवारे / होत न आज्ञा बिनु पैसारे //
सब सुख लहै तुम्हारी सरना /तुम रच्छक काहू को डर ना //
आपन तेज सम्हारो आपै / तीनों लोक हाँक तें कांपै //
भूत पिसाच निकट नहिं आवै / महाबीर जब नाम सुनावै //
नासै रोग हरै सब पीरा /जपत निरन्तर हनुमत बीरा //
संकट तें हनुमान छुड़ावै / मन क्रम बचन ध्यान जो लावै //
सब पर राम तपस्वी राजा / तिन के काज सकल तुम साजा //
और मनोरथ जो कोइ लावै / सोइ अमित जीवन फल पावै //
चारों जग परताप तुम्हारा / है परसिद्ध जगत उजियारा //
साधु संत के तुम रखवारे / असुर निकंदन राम दुलारे //
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता / अस बर दीन जानकी माता //
राम रसायन तुम्हरे पासा / सदा रहो रधुपति के दासा //
तुम्हरे भजन राम को पावै / जनम जनम के दुख बिसरावै //
अंत काल रधुबर पुर जाई / जहाँ जन्म हरी-भक्त कहाई //
और देवता चित न धरई / हनुमत सेइ सर्ब सुख करई //
संकट कटै मिटै सब पीरा / जो सुमिरै हनुमत बलबीरा //
जै जै जै हनुमान गोसाई / कृपा करहु गुरु देव की नाई //
जो सत बार पाठ कर कोई / छुटहि बंदि महा सुख होई //
जो यह पढ़ै हुनमान चालीसा / होय सिद्धि साखी गौरीसा //
तुलसीदास सदा हरि चेरा / कीजै नाथ ह्रदय महँ डेरा //

दोहा : 
पवनतनय संकट हरन , मंगल मूरति रूप / राम लखन सीता सहित , हृदय बसहु सुर भूप //

// इति //

शुक्रवार, 12 अप्रैल 2024

आकर्षण के कानून के साथ अपनी इच्छाओं को पूरा करें

 परिचय:

आकर्षण के शक्तिशाली नियम के माध्यम से अपने सपनों और इच्छाओं को प्रकट करने के प्रवेश द्वार में आपका स्वागत है। यहां, हम उन सिद्धांतों और प्रथाओं पर चर्चा करते हैं जो आपको उस जीवन को बनाने के लिए सार्वभौमिक ऊर्जा का उपयोग करने में मदद कर सकते हैं जिसकी आपने हमेशा कल्पना की है। आइए एक साथ इस परिवर्तनकारी यात्रा पर चलें।


1: आकर्षण के नियम को समझना

i: आकर्षण का नियम क्या है?

आकर्षण का नियम एक सार्वभौमिक सिद्धांत है जो बताता है कि जैसे जैसा आकर्षित होता है। संक्षेप में, आप जिन भी विचारों, विश्वासों और भावनाओं पर लगातार ध्यान केंद्रित करते हैं, वे आपकी वास्तविकता में प्रकट होंगे। इस मौलिक नियम को समझना सचेतन रूप से अपनी इच्छानुसार जीवन बनाने की दिशा में पहला कदम है।


ii: आकर्षण का नियम कैसे काम करता है?

आकर्षण का नियम आपके विचारों, विश्वासों और भावनाओं की शक्ति से संचालित होता है, जो ब्रह्मांड में कंपन आवृत्तियों का उत्सर्जन करता है। अपने विचारों और भावनाओं को अपनी इच्छाओं के साथ जोड़कर, आप अपने जीवन में संबंधित अनुभवों, लोगों और अवसरों को आकर्षित कर सकते हैं।


2: आकर्षण का नियम लागू करना

i: अपनी इच्छाओं को स्पष्ट करें

अपनी इच्छाओं को प्रभावी ढंग से प्रकट करने के लिए, यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि आप क्या चाहते हैं। अपने लक्ष्यों को स्पष्टता, विशिष्टता और सकारात्मकता के साथ देखने और परिभाषित करने के लिए समय निकालें। आपके इरादे जितने स्पष्ट होंगे, आपकी इच्छाओं की ऊर्जा के साथ तालमेल बिठाना उतना ही आसान हो जाएगा।


ii: सकारात्मक मानसिकता विकसित करें

आपके विचार और विश्वास अभिव्यक्ति प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कृतज्ञता, आशावाद और प्रचुरता पर ध्यान केंद्रित करके सकारात्मक मानसिकता विकसित करें। अपनी चेतना को सकारात्मकता और संभावना की ओर स्थानांतरित करने के लिए प्रतिज्ञान, दृश्य और कृतज्ञता अभ्यास का अभ्यास करें।


iii: अपने विचारों, भावनाओं और कार्यों को संरेखित करें

अपने विचारों, भावनाओं और कार्यों को अपनी इच्छाओं के साथ संरेखित करना उन्हें वास्तविकता में प्रकट करने की कुंजी है। आप जो चाहते हैं उस पर ध्यान केंद्रित रखें, सकारात्मक भावनात्मक स्थिति बनाए रखें और अपने लक्ष्यों के प्रति प्रेरित कार्रवाई करें। प्रक्रिया पर भरोसा रखें और विश्वास करें कि ब्रह्मांड आपके पक्ष में साजिश रच रहा है।


3: अभिव्यक्ति के लिए उपकरण और तकनीक

i: विज़ुअलाइज़ेशन ( Visualization )

विज़ुअलाइज़ेशन आपके अवचेतन मन को प्रोग्राम करने और आकर्षण के नियम को सक्रिय करने की एक शक्तिशाली तकनीक है। विशद विवरण और भावनात्मक तीव्रता के साथ अपने वांछित परिणामों की एक मानसिक छवि बनाएं। कल्पना करें कि आप पहले से ही अपने सपनों को जी रहे हैं, और खुशी और संतुष्टि महसूस करें जैसे कि यह पहले से ही हो रहा है।


ii: पुष्टि ( Affirmations )

पुष्टिकरण ( Affirmations ) सकारात्मक कथन हैं जो आपके वांछित विश्वासों और परिणामों को पुष्ट करते हैं। अपने अवचेतन मन ( sub conscious mind ) को पुन: प्रोग्राम ( Reprogram ) करने और अपनी इच्छाओं की ऊर्जा के साथ संरेखित करने के लिए नियमित रूप से प्रतिज्ञान दोहराएं। ऐसे प्रतिज्ञान चुनें जो व्यक्तिगत रूप से आपके अनुरूप हों और सशक्तिकरण और संभावना की भावनाएँ पैदा करें।


iii: कृतज्ञता ( Gratitude )

कृतज्ञता प्रचुरता की ऊर्जा को बढ़ाने और आपके जीवन में अधिक आशीर्वाद आकर्षित करने का एक शक्तिशाली उपकरण है। आपके पास पहले से मौजूद आशीर्वाद, अवसरों और अनुभवों को स्वीकार और सराहना करके प्रतिदिन कृतज्ञता का अभ्यास करें। जितना अधिक आप कृतज्ञता पर ध्यान केंद्रित करेंगे, उतनी अधिक प्रचुरता आप आकर्षित करेंगे।


निष्कर्ष:

आकर्षण का नियम आपकी इच्छाओं को प्रकट करने और आपके सपनों का जीवन बनाने का एक गहरा उपकरण है। आकर्षण के नियम के सिद्धांतों को समझकर और दिए गए उपकरणों और तकनीकों को लागू करके, आप अपनी गहरी इच्छाओं को पूरा करने के लिए ब्रह्मांड की शक्ति का उपयोग कर सकते हैं और आनंद, प्रचुरता और पूर्णता का जीवन जी सकते हैं। खुले दिल और अटूट विश्वास के साथ यात्रा को अपनाएं और देखें कि जादू आपकी आंखों के सामने प्रकट होता है।

रविवार, 28 जनवरी 2024

प्रमुख 14 गुरु कृपा मन्त्र 2024

किसी भी इच्छापूर्ति के लिए रोजाना 5 माला जाप करें या 25 मिनट गुरु फोटो को देखते हुये धैर्य से इच्छा या मन्त्र दोहराते रहो|
रोज अभ्यास करने से गुरु कृपा प्राप्त होती हैं जिसके परिणाम स्वरुप इच्छापूर्ति होती हैं |





 * सभी सुख के लिए : गुरु शरणम् सर्वं सुखम् |

* समृद्धि के लिए : गुरु कृपा शक्ति महान बनाओ मुझे समृद्धिवान |
* स्वस्थ के लिए : गुरु कृपा शक्ति महान प्रदान करो मेरी निर्मल काया |
* धन वृद्धि के लिए : गुरु कृपा ईश्वरीय शक्ति करो धन में वृद्धि महान |
* व्यापार वृद्धि के लिए : गुरु कृपा ईश्वरीय शक्ति करो व्यापार में वृद्धि महान |
* धन वर्षा के लिए : गुरु कृपा ईश्वरीय शक्ति करो मेरे घर धन वर्षा |
* रोग निवारण के लिए : गुरु कृपा ईश्वरीय शक्ति हरो सारे रोग हमारे |
* वाधा निवारण के लिए : गुरु कृपा ईश्वरीय शक्ति नाश करे मेरे जीवन की वाधा |
* विद्या प्राप्ति के लिए : गुरु कृपा ईश्वरीय शक्ति बना रहा मुझे ज्ञानी महान |
* सफलता के लिए : गुरु कृपा ईश्वरीय शक्ति बना रहा है मुझे सफल |
* गृह लक्ष्मी के लिए : गुरु कृपा प्रदान करो वांछित घर हमारा |
* धन आकर्षण के लिए : गुरु कृपा करो धन वर्षा भारी |
* सुन्दरता (स्त्री) के लिए : गुरु कृपा दो रम्भा उर्वशी मोहिनी सूरत |
* स्वस्थ,समृद्धि और खुशहाल जीवन के लिए : गुरु कृपा रखो स्वस्थ, समृद्ध और खुशहाल |

गुरुवार, 3 नवंबर 2022

mantra sadhana ke niyam

 

मंत्र साधना के नियम :-

  • तन की शुद्धि के लिए स्नान आवश्यक है | स्नान से शरीर को शीतलता प्राप्त होती | जिसका मन पर भी प्रभाव पड़ता है | पूजा-आराधना,साधना आदि पुण्य कार्य आरम्भ करने से पूर्व स्नान अवश्य करें | यदि शरीर में किसी प्रकार की विवशता हो तो हाथ मुंह धोकर या गीले कपड़े से पूरे शरीर को पौंछ्कर भी साधना आरंभ की जा सकती है | शरीर पर एक अधोवस्त्र तथा दूसरा उपवस्त्र धारण करें | शरद ऋतू में गरम वस्त्र का उपयोग किया जा सकता है |
  • साधना के लिए एकांत स्थान का चयन करना चाहिए |
  • बैठने के लिए आसन का विशेष ध्यान रखना चाहिए | साधना में पालथी मारकर बैठे और मेरुदंड को सीधा रखे |
  • कुशासन, रेशमी आसन, ऊनी , म्रगचर्म अथवा व्याघ्र चर्म आदि में से साधना के अनुकूल आसन का प्रयोग करें |
  • प्रातः काल पूर्व की ओर तथा सांयकाल पश्चिम दिशा की ओर मुख करके जप करना चाहिए | कुछ विशिष्ट साधनाओं में साधनानुसार दिशा का विचार किया जाना चाहिए | ब्रह्म मुहूर्त में साधना उत्तम मानी गयी है |
  • साधना सदैव एक निश्चित स्थान पर करनी चाहिए | स्थान शुद्ध एवं स्वच्छ हो | स्थान में बदलाव न करें |
  • माला जप करते समय सुमेरु का उलंघन नहीं करना चाहिए अर्थात जप करते समय सुमेरु तक पहुंचे फिर वहाँ से माला को उल्टा कर देना चाहिए |
  • 108 मानकों वाली जप माला का उपयोग करना उत्तम होता है |
  • मंत्र जप के समय माला को गोमुखी में रखना चाहिए |
  • जप करते समय झूमना, पैर हिलाना आदि वर्जित माना जाता है |
  • जप करते समय मन को निर्मल एवं निष्कपट रखें |
  • जप के समय कंठ से ध्वनि होनी चाहिए , होंठ भी हिलने चाहिए किन्तु कंठ ध्वनि ऐसी हो की निकट बैठे व्यक्ति को सुनाई न दे |
  • पूजा से बचे पदार्थों को एकत्रित करके नदी में ले जाकर प्रवाहित करना चाहिए |
  • साधना किसी योग्य गुरु के निर्देशन में ही करनी चाहिए |
  • साधना काल में मल-मूल विसर्जन की विवशता होने पर पुनः हाथ-पैर , मुँह आदि धोकर ही बैठे और एक माला प्रायश्चित की फेरें |
  • प्रातः काल जप करते समय माला नाभि के सामने, दोपहर को ह्रदय के सामने और सांयकाल मस्तक के सामने होनी चाहिए |
  • साधना या मंत्र जप के लिए दीक्षा अवश्य ले |

सोमवार, 8 फ़रवरी 2016

chhinnamasta mantra

Chhinnamasta mantra
This sadhana can be started Thursday after 10 pm. Sit facing the north on a red mat. Cover a wooden seat with a red cloth and on it in a plate place a chhinnamasta yantra. Then light a lamp. Then chant one round of Guru Mantra. Next with a rosary chant 21 round of the Mantra.
Om shreem hreem aim vajra vairochaniye aim hreem shreem om phat swaha
Do this for 51 days. After 51 days ,& place the yantra in your worship place. Briefly worship it daily by lighting and chanting the Mantra 108 times

शुक्रवार, 27 नवंबर 2015

इच्छपूर्ति मंत्र

इच्छापूर्ति मन्त्र किसी भी दिन शुरू करें / सुवह 10 बजे से पहले /
सामने एक इलायची रखें /
कोई भी प्रकार का दीपक लगाएं /
दीपक को देखते हुएं 51 बार प्रतिदिन जप करें/
मन्त्र :
ओम ह्रीं मम मनोवांछित कुरु कुरु स्वाहा 
इस मन्त्र का प्रतिदिन जप करने से मनोवांछित कार्य शीध्र सिद्ध होते हैं /
कार्य पर जाते समय इलायची अपने साथ रखें/


सोमवार, 5 अक्टूबर 2015

SAMMOHAN SADHANA

SAMMOHAN SADHANA
This sadhana can be started on any Friday after 10 pm. Sit facing the east on a yellow mat. Cover a wooden seat with a yellow cloth and on it in a plate place a Sammohan Yantra. Then light a lamp. Then chant one round of Guru Mantra. Next with a Ratipriya rosary chant 11 round of the Mantra.
Om Hreem Surya Sammohay Hreem Om
Do this daily for 11days. After the Sadhana drop all the articles in a river.


RATI PRIYA SAMMOHAN SADHANA
This sadhana can be started on any Friday after 10 pm. Sit facing the east on a yellow mat. Cover a wooden seat with a yellow cloth and on it in a plate place a Sammohan Yantra. Then light a lamp. Then chant one round of Guru Mantra. Next with a Ratipriya rosary chant 11 round of the Mantra.
Om Sam Sankarshannaay Rati Priyaay Phat
The next day leave the articles in a river.

LAXMI SADHANA

LAXMI SADHANA


Start this sadhana on any Wednesday after 10pm. Sit facing the south on a red mat. Cover a wooden seat with a white cloth and on it in a plate place a Laxmi Yantra. Then light a lamp. Then chant one round of Guru Mantra. Next with a Kamalgatta rosary chant 51 round of the Mantra.
Om Shreem Hreem Kleem Shreem OM Phat
Do this for two days. After that drop the rosary in a river & place the Yantra in your worship place. Briefly worship it daily by lighting and chanting the Mantra 21 times.

BHUVANESHWARI MAHAVIDHYA SADHANA

BHUVANESHWARI MAHAVIDHYA SADHANA


This sadhana can be started on a Full Moon Night after 10 pm. Sit facing the north on a yellow mat. Cover a wooden seat with a yellow cloth and on it in a plate place a Bhuvaneshwari Yantra. Then light a lamp. Then chant one round of Guru Mantra. Next with a Bhuvaneshwari rosary chant 21 round of the Mantra.
Om Hreem Shreem Kleem Bhuvaneshwaryei namah
Do this for three days. After that drop the rosary in a river & place the Yantra in your worship place. Briefly worship it daily by lighting and chanting the Mantra 21 times

KANAKDHARA SADHANA

KANAKDHARA SADHANA



This sadhana can be started on any Wednesday after 10 pm. Sit facing the north on a yellow mat. Cover a wooden seat with a yellow cloth and on it in a plate place a Kanakdhara Yantra. Then light a lamp. Then chant one round of Guru Mantra. Next with a Kanakdhar rosary chant 11 round of the Mantra.
Om Vam Shreem Vam Ayeim Hreem Shreem Kleem kanakdhaaraayei namah

ROG MUKTI SADHANA

ROG MUKTI SADHANA


ROG MUKTI HANUMAAN SADHANA
A simpler yet quite as effective form of that powerful Tantra Sadhana is being revealed here It must be started only on a Tuesday after 10 pm. Have a both and get into red robes. Cover a wooden seat with cloth. On it sprinkle some vermilion. In the centre place Hanumaan Yantra. Sit on a red mat in veerasan ,facing south. Pray to the Guru for success. Light a ghee lamp. Bathe the Yantra with water. Wipe it dry & put a mark of vermilion on it. Put a similar mark on your forehead. Offer a red flower and fruit on the Yantra. Next with a red coral rosary (red moonga mala) chant 21 rounds of this Mantra.
Om Namo Bhagwate Aanjaneyaay Mahaabalaay Hanumate Namah
After Sadhana go to sleep at the very spot. Do this daily for 11days.Eat the fruit offered yourself. This Sadhana win the grace of the Lord for the sadhak &his family members. It is necessary to maintain celibacy during these 11 days.

ROG MUKTI BY HANUMAAN SADHANA
On any Tuesday night after 9pm the ailing person should sit for sadhana facing south on a red mat .Before himself he should place a Bajrang Vigrah on a wooden seat covered with red cloth . He should light an oil lamp. Next he should take 21 seeds of chirmi in his hand and moved them around his head. These he should then put aside and throw them in the south direction from his house after that night’s sadhana is over. Thereafter with a red coral rosary he must chant 5rounds of this Mantra.
Om Shreem Hreem Ayeim Phat
After Sadhana wear the rosary around your neck. After 30 days of completion of sadhana throw the rosary & Bajrang Vigrah in a river/pond.

URVASHI SOUNDARYA SADHANA

URVASHI SOUNDARYA SADHANA


Start this sadhana on any Friday after 10pm. Have a bath & wear beautiful clothes. Spray perfume in the room. Sit facing the north on a yellow mat. Cover a wooden seat with a yellow cloth and on it in a plate place a Urvashi Yantra. On the right side of the Yantra make a mound of rice grains & on it place a Urvashi Rosary. Then light a lamp. Pray to Guru for success in the sadhana. Then chant one round of Guru Mantra. Next with a Urvashi rosary chant 21 round of the Mantra.
Om Sam Soundarya Siddhaye Swaahaa
Do this for three days. After that drop the rosary in a river & place the Yantra in your worship place. .

TRIPUR BHEIRAVI MAHAVIDHYA SADHANA

TRIPUR BHEIRAVI MAHAVIDHYA SADHANA


Start this sadhana on any Saturday after 10pm. Sit facing the south on a red mat. Cover a wooden seat with a red cloth and on it in a plate place a Tripur Bheiravi Yantra. On the right side of the Yantra make a mound of black sesame seeds & on it place a Madhuroopen Rudraksh.Then light a lamp. Then chant one round of Guru Mantra. Next with a white Hakeek rosary chant 21 round of the Mantra.
Hasein Has Kareem Hasein
Do this for two days. After that drop the rosary in a river & place the Yantra in your worship place. 

SHIV SADHANA

SHIV SADHANA



Start this sadhana on any Monday after 10pm. Have a bath & wear white clothes. Sit facing the north on a white mat. Cover a wooden seat with a white cloth and on it in a plate place a Shiva Yantra. Offer on it rice grains and vermilion. Then mark 16 marks with vermilion on it chanting Om Namah Shivaay. Light a lamp. Then chant one round of Guru Mantra. Next with a white Rudaksh rosary chant 11 round of the Mantra.
Om Aanaand Taandavaay Namah
After that drop the rosary in a river.

GANPATI SADHANA

GANPATI SADHANA
Start this sadhana on any Wednesday. Sit facing the east on a yellow mat. Cover a wooden seat with a yellow cloth and on it in a plate place a Paarad Ganpati . On the right side of the Ganpati make a mound of rice grains& on it place a Iksha Purti Gutika .Then light a lamp. Then chant one round of Guru Mantra. Next with a yellow Hakeek rosary chant 21 round of the Mantra.
Om Gam Ganpataye Namah
Do this for three days. After that drop the rosary and Iksha Purti Gutika in a river & place the Paarad Ganpati in your worship place. .

KALI MAHAVIDHYA SADHANA

KALI  MAHAVIDHYA SADHANA
This sadhana can be tried any eight day of dark fortnight of a lunar month. At after 10pm have a bath and get into yellow clothes. Sit on a yellow mat facing south. Cover a wooden seat with red cloth. On it place Mahakali Yantra and light a lamp. Fixing your gaze on the flame of lamp. Next chant 51 round of the Mantra with Mahakali rosary.
Om Kreem Kreem Mahakali Kreem Kreem Namah
Next day drop the Yantra and rosary in a river.

GURU SADHANA

GURU SADHANA
Start this sadhana on any Thursday. Sit facing the north on a yellow mat. Cover a wooden seat with a yellow cloth and on it in a plate place a Guru Yantra. Then light a lamp. Next with a Gurur rosary chant 11 round of the Mantra.

Om Hreem Gurubhyo Namah

Chant this Mantra daily.

VASHIKARNA SADHANA

VASHIKARNA SADHANA


This sadhana can be tried any eight day of dark fortnight of a lunar month. At after 10pm have a bath and get into yellow clothes. Sit on a yellow mat facing south. Cover a wooden seat with red cloth. On it place Mahakali Yantra and light a lamp. Fixing your gaze on the flame of lamp. Next chant 51 round of the Mantra with Mahakali rosary.
Om Kreem sarvjan vashi vashi kuru kuru swaha
Next day drop the Yantra and rosary in a river.